18 August 2026

₹60 दर्जन केला, बजट सिर्फ ₹48: मिड-डे मील में बजट और बाजार भाव का अंतर बना सवाल

 

₹60 दर्जन केला, बजट सिर्फ ₹48: मिड-डे मील में बजट और बाजार भाव का अंतर बना सवाल


मिड-डे मील में बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना प्राथमिकता है, लेकिन बाजार भाव और निर्धारित बजट के बीच का अंतर शिक्षकों के सामने व्यावहारिक चुनौती खड़ी कर रहा है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक उदाहरण में केले की कीमत और मिड-डे मील के लिए उपलब्ध बजट के बीच स्पष्ट अंतर दिखाया गया है।


जानकारी के अनुसार, स्थानीय मंडी में केले का भाव करीब ₹60 प्रति दर्जन बताया गया है। वहीं, मिड-डे मील व्यवस्था में ₹4 प्रति बालक के हिसाब से 12 बच्चों के लिए एक दर्जन केले की लागत ₹48 बैठती है।


बाजार भाव ₹60, बजट ₹48


यदि एक दर्जन केले का बाजार मूल्य ₹60 है और निर्धारित बजट ₹48 है, तो दोनों के बीच ₹12 प्रति दर्जन का अंतर रह जाता है। ऐसे में विद्यालयों के सामने सवाल यह है कि निर्धारित राशि में बाजार से उसी गुणवत्ता और मात्रा का फल कैसे खरीदा जाए।


शिक्षकों का कहना है कि वे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण फल उपलब्ध कराना चाहते हैं और बच्चों के स्वास्थ्य से किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहते। लेकिन बाजार में वस्तुओं की वास्तविक कीमत और सरकारी दर के बीच अंतर होने पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव की स्थिति पैदा हो सकती है।


निरीक्षण में केवल फल नहीं, कीमत भी हो चर्चा का विषय


मिड-डे मील के निरीक्षण के दौरान अक्सर यह देखा जाता है कि बच्चों को निर्धारित खाद्य सामग्री मिली या नहीं। लेकिन जमीनी स्तर पर यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि जिस दर पर बजट निर्धारित किया गया है, उस दर पर संबंधित सामग्री बाजार में उपलब्ध है या नहीं।


यदि बाजार भाव निर्धारित बजट से अधिक है, तो विद्यालय स्तर पर गुणवत्ता बनाए रखते हुए पूरी मात्रा उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल शिक्षक की नहीं


मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। इसके लिए बजट, बाजार दर, खरीद प्रक्रिया और निगरानी—सभी पहलुओं का समन्वय जरूरी है।


शिक्षकों की भूमिका बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने और उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है, लेकिन बजट और बाजार मूल्य के बीच के अंतर का समाधान केवल शिक्षक के स्तर पर नहीं किया जा सकता।


जमीनी हकीकत पर ध्यान देने की जरूरत


केले की कीमत का यह उदाहरण एक व्यापक सवाल उठाता है—क्या मिड-डे मील के लिए निर्धारित दरें मौजूदा बाजार भाव के अनुरूप हैं?



शिक्षकों की मांग है कि निरीक्षण व्यवस्था में केवल यह न देखा जाए कि फल उपलब्ध कराया गया या नहीं, बल्कि यह भी देखा जाए कि निर्धारित बजट में गुणवत्तापूर्ण सामग्री खरीदना व्यवहारिक रूप से संभव है या नहीं।


बच्चों को पौष्टिक भोजन मिलना जरूरी है, लेकिन इसके लिए निर्धारित बजट भी बाजार की वास्तविक कीमतों के अनुरूप होना चाहिए। यही संतुलन विद्यालयों और शिक्षकों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को कम कर सकता है।


नोट: केले के ₹60 प्रति दर्जन बाजार भाव और ₹48 प्रति दर्जन बजट का आंकड़ा प्रस्तुत सामग्री/पोस्ट में दिए गए उदाहरण पर आधारित है; स्थानीय बाजार दर और विभागीय वर्तमान दर अलग हो सकती है।