प्रधानाध्यापक कक्ष में बनता है मिड-डे-मील, अल्टीमेटम

संभल। मिशन कायाकल्प के तहत परिषदीय स्कूलों की सूरत सुधारने के लिए 14 बिंदु तय किए गए। इनका उद्देश्य छात्रों को बेहतर वातावरण देना और शिक्षा का स्तर सुधारना था, लेकिन जिले में ये योजना मानकों पर खरी उतरती नहीं दिख रही है।

सौंधन के मोहम्मदपुर भंडा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय की चाहरदीवारी नहीं है। मिड-डे-मील भी प्रधानाध्यापक कक्ष में बन रहा है। इसके अलावा हाल ये है कि जिले के तमाम परिषदीय स्कूलों में अभी भी कहीं पर बाउंड्रीवाल नहीं है, तो कहीं विकलांग बच्चों के लिए शौचालय नहीं बने हैं। फर्श और गेट तक टूटा है।




जिले में प्राइमरी, जूनियर और कंपोजिट स्कूलों को आकर्षक और पठन योग्य बनाने के लिए 14 बिंदु जैसे रंगाई पुताई, ग्रीन बोर्ड, कक्षों में वायरिंग व मल्टीपल हैंडवाश दिव्यांग रैंप आदि कार्य शिक्षकों को कंपोजिट ग्रांट से कराने थे। वहीं | बालक बालिका के लिए अलग से शौचालय, इंटरलॉकिंग टाइल्स व रसोई घर का निर्माण आदि कार्य प्रधानों द्वारा ब्लाक स्तर पर ग्राम पंचायत की मद से कराए जाने थे।


कुल 14 बिंदुओं पर कार्य कराने के लिए न सिर्फ शिक्षक व प्रधानों को जवाबदेह बनाया गया, बल्कि खंड विकास कार्यालयों को निर्देश भी दिए गए, लेकिन फिर भी स्कूलों की हालत में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। कायाकल्प योजना के तहत अभी भी अधिकांश विद्यालयों में कहीं चहारदीवारी नहीं है तो काफी स्कूलों में अभी टाइल्स का काम बाकी है। कुछ स्कूलों में रनिंग वाटर सिस्टम क्रियाशील नहीं शासन प्रति माह शिक्षकों से सूचना मांगता है पर पंचायत स्तर पर हीलाहवाली के चलते यह कार्यअधूरे पड़े हैं।

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