इलेक्शन ड्यूटी में शिक्षकों के साथ खेल कर गए शिक्षक नेता



प्रतापगढ़, । लोकसभा चुनाव की ड्यूटी से खुद को बचाने के लिए शिक्षक नेता ही अपने साथी शिक्षकों के साथ खेल कर गए। नतीजा चुनाव में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित और बैशाखी के सहारे चलने वाले दिव्यांग शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई। यही नहीं अफसरों की सख्ती का हवाला देकर शिक्षक नेता अपने साथियों को हर हाल में ड्यूटी करने की नसीहत भी दे रहे हैं।

चुनाव लोक सभा, विधान सभा अथवा पंचायत का हो, मतदान कराने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग की रहती है। कारण परिषदीय स्कूल के शिक्षकों को ही मतदान कार्मिक के रूप में चयनित किया जाता है। बावजूद इसके जिले के अलग अलग परिषदीय स्कूलों में तैनात शिक्षक संघ के पदाधिकारियों की ड्यूटी किसी चुनाव में नहीं लगाई जाती।



इस बार मतदान कार्मिकों की सूची जारी होते ही शिक्षकों ने इस बात को लेकर विरोध शुरू कर दिया। विरोध के स्वर अफसरों तक पहुंचे तो जिले के आलाधिकारियों ने शिक्षक संघ के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई, जिसमें तय हुआ कि शिक्षक नेताओं की ड्यूटी कार्मिकों के प्रशिक्षण स्थल पर लगाई जा रही है। इससे कार्मिक के रूप में चिन्हित किए गए शिक्षक संतुष्ट हो जाएंगे। आनन फानन बीएसए ने शिक्षक संघ के 56 पदाधिकारियों की नई ड्यूटी लिस्ट जारी कर दी। हालांकि प्रशिक्षण स्थल पर तैनात किए गए एक भी शिक्षक नेता दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे।

नौकरी बचाने के लिए ले रहे प्रशिक्षण : लोकसभा चुनाव के लिए कराए जा रहे प्रशिक्षण में ऐसे शिक्षक भी शामिल हैं जो 80 फीसदी दिव्यांग है लेकिन अफसरों से इसकी शिकायत भी नहीं कर रहे हैं। कमोवेश यही हाल कैंसर पीड़ित शिक्षकों का भी है। कारण उन्हें इस बात का डर है कि विभाग उनकी ही जांच शुरू करा देगा।

एआरपी भी ड्यूटी से रखे गए मुक्तः जिले के अलग-अलग विकास खंड में 90 एआरपी नियुक्त किए गए हैं। इनकी जिम्मेदारी स्कूलों में जाकर निपुण भारत अभियान का प्रचार प्रसार करना है। यह न अपने तैनाती वाले स्कूल में हैं और न ही चुनाव ड्यूटी में।


■ खुद को बचाने के लिए बीमार और दिव्यांगों की लगवा दी ड्यूटी

■ शिक्षक संघ के 56 पदाधिकारियों की कागज पर ड्यूटी कर रहे