28 August 2026

UPTET Result 2026: एनआईओएस डीएलएड अभ्यर्थियों का परिणाम रोका, 18 माह के प्रशिक्षण को लेकर विवाद के बीच आयोग का बड़ा फैसला

 

UPTET Result 2026: एनआईओएस डीएलएड अभ्यर्थियों का परिणाम रोका, 18 माह के प्रशिक्षण को लेकर विवाद के बीच आयोग का बड़ा फैसला

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 के परिणाम को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने एनआईओएस (NIOS) के माध्यम से 18 माह का डीएलएड प्रशिक्षण करने वाले अभ्यर्थियों के परिणाम रोक दिए हैं। ये अभ्यर्थी कोर्ट के आदेश के आधार पर यूपीटीईटी परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन फिलहाल उनका परिणाम घोषित नहीं किया गया है।

कोर्ट के आदेश पर परीक्षा में शामिल हुए थे अभ्यर्थी

समाचार रिपोर्ट के अनुसार, एनआईओएस के माध्यम से 18 महीने का डीएलएड करने वाले अभ्यर्थियों के यूपीटीईटी परिणाम पर रोक लगाई गई है। मामला प्रशिक्षण की वैधता से जुड़ा हुआ है। बताया गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में इस मामले को लेकर याचिका दाखिल की गई थी।

24 अप्रैल को कोर्ट ने संबंधित अभ्यर्थियों को सशर्त यूपीटीईटी में शामिल करने का आदेश दिया था। इसी आदेश के आधार पर कुछ अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ऐसे अभ्यर्थियों का परिणाम अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। फिलहाल परिणाम का अंतिम रूप से प्रकाशन नहीं किया गया है।

चयन आयोग ने क्यों रोका परिणाम?

एनआईओएस से डीएलएड करने वाले अभ्यर्थियों की पात्रता को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसी वजह से चयन आयोग ने परीक्षा में शामिल होने के बावजूद संबंधित अभ्यर्थियों के परिणाम रोक दिए हैं।

समाचार में यह भी बताया गया है कि हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में उन अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी, जो 31 मार्च 2015 अथवा उससे पूर्व सेवा में थे। हालांकि, उनकी पात्रता अंतिम न्यायिक निर्णय के अधीन रखी गई है।

यूपीटीईटी के नॉर्मलाइज्ड स्कोर ने चौंकाया

रिपोर्ट में यूपीटीईटी के नॉर्मलाइज्ड स्कोर को लेकर भी चर्चा की गई है। परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने और अलग-अलग पालियों में परीक्षा आयोजित होने के कारण चयन आयोग ने नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया के आधार पर परिणाम तैयार किया।

रिपोर्ट के अनुसार, यूपीटीईटी के लिए 19,94,661 अभ्यर्थियों की संख्या का उल्लेख किया गया है। अलग-अलग पालियों में प्रश्नपत्रों की कठिनाई के अंतर को ध्यान में रखते हुए अंकों का समानीकरण किया गया।

इसी प्रक्रिया के बाद कुछ अभ्यर्थियों के नॉर्मलाइज्ड स्कोर में उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला। समाचार में उदाहरण देते हुए बताया गया है कि किसी अभ्यर्थी का मूल स्कोर 150 से अधिक होने के बावजूद नॉर्मलाइजेशन के बाद स्कोर में बदलाव हुआ, जबकि दूसरे अभ्यर्थी को इससे अधिक नॉर्मलाइज्ड अंक मिले।

चयन आयोग के उप सचिव डॉ. संजय सिंह के हवाले से बताया गया है कि अलग-अलग शिफ्ट में प्रश्नपत्रों की कठिनाई के आधार पर स्कोर को नॉर्मलाइज किया गया है। आयोग का कहना है कि प्रक्रिया में किसी गड़बड़ी की बात नहीं है।

करीब 60 हजार अभ्यर्थियों के परिणाम भी अस्वीकृत

यूपीटीईटी 2026 के परिणाम में करीब 60 हजार अभ्यर्थियों के परिणाम रिजेक्ट होने की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, परिणाम अस्वीकृत होने के पीछे अमान्य रोल नंबर, प्रश्नपत्र बुकलेट संख्या दर्ज करने समेत अन्य कारण बताए गए हैं।

इसको लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों में नाराजगी है। कुछ अभ्यर्थियों ने परिणाम जारी होने से पहले ही प्रत्यावेदन और शिकायतें भी की थीं। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार आयोग ने इन शिकायतों पर विचार किए बिना परिणाम जारी कर दिया।

अभ्यर्थियों ने की पुनर्विचार की मांग

परिणाम अस्वीकृत होने और एनआईओएस डीएलएड अभ्यर्थियों का परिणाम रोके जाने के बाद अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ गई है। छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय कुमार यादव ने मानवीय गलती को ध्यान में रखते हुए ओएमआर शीट की मैनुअल जांच कराकर सभी अभ्यर्थियों का परिणाम जारी करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि ऐसा होने से आगामी शिक्षक भर्ती में अधिक अभ्यर्थियों को अवसर मिल सकेगा।

आगे क्या होगा?

एनआईओएस डीएलएड अभ्यर्थियों के मामले में अब परिणाम जारी होने का रास्ता न्यायालय के अंतिम निर्णय से जुड़ा हुआ है। वहीं, करीब 60 हजार अस्वीकृत परिणाम वाले अभ्यर्थियों के लिए भी आगे आयोग या न्यायालय की ओर से कोई राहत मिलती है या नहीं, इस पर नजर बनी हुई है।