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06 May 2023

पेंशन वृद्धि के लिए हर कंपनी का फॉर्म जरूरी


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ऊंची पेंशन का विकल्प चुनने वालों को अपने पुराने नियोक्ताओं के साथ संयुक्त फॉर्म ईपीएफओ को देना होगा।

मामले से जुड़े अधिकारी के मुताबिक अगर कर्मचारी बढ़ी हुई पेंशन का विकल्प चुनता है तो तय अवधि में अगर उसने नौकरियां बदली हैं तो उन सभी कंपनी की मंजूरी लेते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को अवगत कराना होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने ऊंची पेंशन का विकल्प चुनने वाले अंशधारकों के मूल वेतन के 1.16 प्रतिशत के अतिरिक्त योगदान के मामले में नोटिफिकेशन जारी किया है। बढ़ी रकम का प्रबंधन ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में नियोक्ता के योगदान से किया जाएगा। श्रम मंत्रालय के मुताबिक भविष्य निधि में नियोक्ताओं के कुल 12 प्रतिशत योगदान में से ही 1.16 प्रतिशत अतिरिक्त अंशदान लेने का फैसला किया गया है।


अतिरिक्त योगदान की आवश्यकता नहीं
अब ईपीएफओ के ऐसे सभी सदस्य जो बढ़ी पेंशन के लिए 15,000 रुपये प्रति माह की सीमा से अधिक वास्तविक मूल वेतन पर योगदान का विकल्प चुन रहे हैं, उन्हें ईपीएस के लिए इस अतिरिक्त 1.16 प्रतिशत का योगदान नहीं करना होगा। मंत्रालय ने कहा उच्चतम न्यायालय के सभी निर्देशों का अनुपालन कर लिया गया है।


कर्मचारियों से पेंशन कोष में योगदान नहीं
श्रम मंत्रालय का साफ मानना है कि कर्मचारियों से पेंशन कोष में योगदान नहीं लिया जाएगा। ये रकम नियोक्ता के ही हिस्से से आनी है। मौजूदा समय में सरकार कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस में योगदान के लिए सब्सिडी के रूप में 15,000 रुपये तक के मूल वेतन का 1.16 प्रतिशत भुगतान करती है।

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