19 August 2026

फांसी सुनाने वाले जज ने 100 हत्या के केस वापस लिए, 129 दिन में 22 को सुनाई फांसी

 

फांसी सुनाने वाले जज ने 100 हत्या के केस वापस लिए, 129 दिन में 22 को सुनाई फांसी

मुजफ्फरनगर। फांसी के फैसलों के कारण चर्चा में आए अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने हत्या के करीब 100 मामलों को जिला जज की अदालत में वापस भेज दिया है। इन मामलों की सुनवाई अब सत्र न्यायालय में होगी।

रिपोर्ट के अनुसार, जज रवि कुमार दिवाकर ने 129 दिनों के दौरान जनपद के नौ चर्चित मामलों में 22 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। छह अप्रैल 2026 से 13 अगस्त तक नौ मामलों में एक महिला समेत 22 दोषियों को मृत्युदंड दिया गया।

मंगलवार को जिला जज वीरेंद्र कुमार सिंह ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही करीब 100 पत्रावलियों को रिकॉल कर लिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के मुताबिक ये सभी मामले हत्या से संबंधित हैं। जिला बार संघ के पूर्व अध्यक्ष अनिल जिंदल और श्यामवीर सिंह ने भी बताया कि संबंधित पत्रावलियां कोर्ट ने रिकॉल की हैं।

इन चर्चित मामलों में सुनाई फांसी

जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने जिन प्रमुख मामलों में मृत्युदंड सुनाया, उनमें समीर सैफी हत्या, शेखर हत्या, राजेश देवी-हिमांशु हत्याकांड, राजेंद्र सैनी हत्याकांड, होमगार्ड रतिराम हत्याकांड, राजवीर हत्याकांड, राज सिंह हत्या, सलीम हत्याकांड और पवन हत्याकांड शामिल हैं।

इन मामलों में कुल 22 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई।

जज ने जान को बताया खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर बरेली से पिछले साल 29 नवंबर को स्थानांतरित होकर मुजफ्फरनगर आए थे। हाल ही में उन्होंने डीजीपी को पत्र भेजकर अपनी जान को खतरा होने की जानकारी भी दी थी।

फांसी के फैसलों की बड़ी संख्या के चलते जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत चर्चा में रही है।