तीन शिक्षकों के हवाले 235 बच्चे, कीचड़ भरे परिसर में पढ़ाई
श्रावस्ती। परिषदीय विद्यालयों की बदहाल स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जिले के कई स्कूलों में कहीं जलभराव है तो कहीं संसाधनों का अभाव। कई विद्यालयों में बच्चों को न तो पर्याप्त पानी मिल रहा है और न ही गर्मी से राहत के लिए बिजली-पंखे की सुविधा।
प्राथमिक विद्यालय बहेला राघव की स्थिति भी बेहद खराब है। बिजली न होने के कारण शिक्षक और छात्र परेशान हैं। बच्चे पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। विद्यालय का भवन जर्जर होने के कारण बच्चों की कक्षाएं भी खुले में या पेड़ की छांव में संचालित हो रही हैं।
प्रधानाध्यापिका के अनुसार बिजली न होने से विद्यालय में इनवर्टर की व्यवस्था की गई थी, लेकिन वह भी खराब हो चुका है। शौचालय की टैंक भी खराब पड़ी है, जिससे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
235 बच्चों पर सिर्फ तीन शिक्षक
हरदत्त नगर गिरंट क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय में 303 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन विद्यालय में केवल तीन शिक्षक तैनात हैं। इनमें दो अनुदेशक और एक शिक्षामित्र शामिल हैं। शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
नया भवन नहीं बना, जर्जर भवन में पढ़ाई
प्राथमिक विद्यालय समवापुर डकाही का भवन जर्जर होने के कारण वर्ष 2021 में ध्वस्त कर दिया गया था। इसके बाद अब तक नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। नतीजतन यहां पढ़ने वाले बच्चों को लगातार परेशानी उठानी पड़ रही है।
कक्षा एक से पांच तक के 82 छात्र-छात्राओं को दो भवनों में एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। एक कमरे में कक्षा एक से तीन और दूसरे कमरे में कक्षा चार से पांच तक के बच्चों की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
शिक्षकों की कमी भी बड़ी समस्या
समवापुर डकाही में शिक्षक और भगवानदास पाल के हवाले से बताया गया कि कई वर्षों से शिक्षकों की कमी बनी हुई है। विद्यालय में प्रधानाध्यापक समेत सीमित स्टाफ होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
विद्यालयों की इन तस्वीरों से स्पष्ट है कि बुनियादी सुविधाओं और पर्याप्त शिक्षकों की कमी के बीच परिषदीय स्कूलों के बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने की चुनौती अभी भी बनी हुई है।

