19 August 2026

तदर्थ शिक्षकों को बड़ा झटका: वरिष्ठता और वित्तीय लाभ निरस्त, गलत भुगतान की होगी वसूली

 

तदर्थ शिक्षकों को बड़ा झटका: वरिष्ठता और वित्तीय लाभ निरस्त, गलत भुगतान की होगी वसूली

जारी आदेशों पर शासन ने लिया सख्त फैसला, पूर्व सेवाओं की गणना अब केवल सेवानिवृत्ति लाभ के लिए होगी

प्रयागराज/वाराणसी। माध्यमिक शिक्षा विभाग में तदर्थ शिक्षकों की वरिष्ठता और वित्तीय लाभ को लेकर शासन ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत तदर्थ शिक्षकों को दिए गए वरिष्ठता एवं वित्तीय लाभ से संबंधित आदेशों को निरस्त कर दिया गया है। साथ ही गलत तरीके से किए गए अतिरिक्त भुगतान की प्रकरणवार गणना कर वसूली के निर्देश दिए गए हैं।

शासन ने 1 मार्च 2024 और 1 मई 2024 को जारी उन सभी आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है, जिनके आधार पर तदर्थ शिक्षकों को उनकी तदर्थ सेवाओं के आधार पर वरिष्ठता एवं वित्तीय लाभ दिए गए थे।

पूर्व सेवा की गणना केवल सेवानिवृत्ति लाभ के लिए

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि चयन बोर्ड से चयनित होकर आए तदर्थ शिक्षकों की पूर्व सेवाओं की गणना केवल सेवानिवृत्ति लाभों के लिए ही की जाएगी। इसका मतलब है कि तदर्थ सेवा अवधि के आधार पर वरिष्ठता अथवा अन्य वित्तीय लाभ का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के संजय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले (26 अगस्त 2020) में दिए गए निर्णय के अनुरूप बताई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट व्यवस्था दी थी कि तदर्थ शिक्षकों की पूर्व सेवा अवधि की गणना केवल पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभों के लिए होगी।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने किया स्पष्टीकरण

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के सख्त रुख के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की है। शासन की ओर से जारी नए आदेश में कहा गया है कि पूर्व में जारी ऐसे आदेश, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विपरीत थे, उन्हें निरस्त किया जा रहा है।

अंबेडकरनगर और प्रतापगढ़ समेत पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में कार्यरत शिक्षकों को गलत तरीके से दी गई वरिष्ठता और वित्तीय लाभ की समीक्षा भी की जाएगी।

अतिरिक्त भुगतान की होगी प्रकरणवार गणना

निरस्त आदेशों के आधार पर शिक्षकों को दिए गए अतिरिक्त वित्तीय लाभ का प्रकरणवार निर्धारण किया जाएगा। इसके बाद गलत तरीके से किए गए भुगतान की समयबद्ध तरीके से वसूली की जाएगी।

शासन ने शिक्षा निदेशक, संयुक्त शिक्षा निदेशक और डीआईओएस स्तर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत जारी सभी आदेशों को तत्काल वापस लेने के निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही

मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी निर्धारित की जाएगी। शासन ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विपरीत आदेश जारी करने या उनका पालन कराने में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध जिम्मेदारी तय की जाएगी।

शिक्षकों पर क्या पड़ेगा असर?

इस फैसले का सीधा असर उन तदर्थ शिक्षकों पर पड़ेगा, जिन्हें पूर्व में तदर्थ सेवा के आधार पर वरिष्ठता या अतिरिक्त वित्तीय लाभ प्रदान किया गया था। अब ऐसे लाभों की समीक्षा होगी और यदि भुगतान नियमों के विपरीत पाया गया तो उसकी वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

महत्वपूर्ण बात: तदर्थ शिक्षकों की पूर्व सेवा पूरी तरह समाप्त नहीं मानी जाएगी। शासन के आदेश के अनुसार इसका लाभ सेवानिवृत्ति संबंधी लाभों की गणना में लिया जा सकेगा, लेकिन इसे वरिष्ठता और अन्य वित्तीय लाभों के आधार के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।