सुप्रीम कोर्ट ने बीएड डिग्रीधारियों के खिलाफ दिया था आदेश, हजारों ने किया था आवेदन
बीटीसी प्रशिक्षुओं ने बीएड वालों को बाहर करने की मांग रखी
बीएड वाले बाहर हुए तो बीटीसी अभ्यर्थियों को होगा फायदा
प्रयागराज,। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों की चर्चित 69000 सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन विवाद के बीच बीएड और बीटीसी अभ्यर्थी आमने-सामने आ गए हैं। संभावित नई सूची में नए अभ्यर्थियों के शामिल होने की प्रक्रिया शुरू होते ही बीटीसी करने वाले अभ्यर्थी सक्रिय हो गए हैं। वे सुप्रीम कोर्ट के 11 अगस्त 2023 के फैसले का हवाला देते हुए मांग कर रहे हैं कि बीएड डिग्रीधारियों को सूची में शामिल न किया जाए।
बीटीसी अभ्यर्थियों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय ने देवेश शर्मा मामले में कहा था कि प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए डीएलएड/बीटीसी ही अनिवार्य योग्यता है। बीएड डिग्री इस पद के लिए वैध नहीं है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में सबमिशन फाइल किया है कि नई सूची तैयार करते समय इस फैसले को सख्ती से लागू किया जाए और बीएड वाले अभ्यर्थियों को बाहर रखा जाए।
वहीं बीएड अभ्यर्थी इस दलील का विरोध कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उनकी नियुक्तियां पुरानी प्रक्रिया के तहत होनी थी लेकिन गलत आरक्षण लगाने के कारण उनका चयन नहीं हो सका था। 69000 शिक्षक भर्ती छह दिसंबर 2018 को शुरू हुई थी। लिखित परीक्षा के बाद मेरिट सूची बनी और 2020 में हजारों अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिली। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर अब चयन सूची का पुनर्निर्माण होना था, जिसपर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दिया था। इस प्रक्रिया में आरक्षण नियमावली 1994 के प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे कई नए अभ्यर्थी सूची में आने की उम्मीद लगा रहे हैं।

