12 August 2026

दूसरी शादी में जानकारी होना पर्याप्त नहीं, सक्रिय भूमिका का प्रमाण जरूरी


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पति की दूसरी शादी के मामले में उसके रिश्तेदारों को केवल इस आधार पर धारा 494 आईपीसी(एक पत्नी के रहते दूसरी शादी करना) के तहत आरोपी नहीं बनाया जा सकता कि उन्हें दूसरी शादी की जानकारी थी। उनके खिलाफ दूसरी शादी में सक्रिय रूप से शामिल होने, उसे कराने में मदद करने या प्रोत्साहित करने का प्रथमदृष्टया ठोस साक्ष्य होना जरूरी है। कोर्ट ने इस आधार पर सास, ससुर और जेठानी के खिलाफ दूसरी शादी से संबंधित आरोप की कार्यवाही रद्द कर दी। हालांकि पति राम प्रताप सिंह के खिलाफ धारा 494 आईपीसी की कार्यवाही जारी रहेगी।



न्यायमूर्ति संदीप जैन ने राम प्रताप सिंह व अन्य की ओर से वर्ष 2008 में दाखिल धारा 482 की अर्जी पर यह आदेश दिया। मामला इटावा की शंकुतला देवी की शिकायत से जुड़ा है। शंकुतला की शादी सात दिसंबर 1991 को राम प्रताप सिंह से हुई थी। आरोप था कि शादी में पर्याप्त दहेज देने के बावजूद पति और ससुराल पक्ष के लोग पांच हजार रुपये और स्कूटर की अतिरिक्त मांग करते थे। मांग पूरी न होने पर उसके साथ मारपीट और प्रताड़ना की गई तथा उसे घर से निकाल दिया गया।


शिकायतकर्ता के अनुसार 28 मार्च 1997 को वह अपनी बड़ी बहन सरोज के साथ ससुराल गई थी। वहां उसके साथ और उसकी बहन के साथ मारपीट की गई। इसी दौरान राम प्रताप सिंह ने कथित तौर पर बताया कि उसने पिंकी नाम की महिला से दूसरी शादी कर ली है। शंकुतला की शिकायत पर धारा 494, 498-ए, 323, 504, 506 आईपीसी तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं 3/4 में मुकदमा दर्ज हुआ था।


जांच के बाद पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी। शंकुतला की आपत्ति पर इसे शिकायत मामले में परिवर्तित किया गया। मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता तथा उसके गवाहों के बयान के आधार पर वर्ष 2003 में आरोपियों को विभिन्न धाराओं में तलब किया था।


हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता और उसकी बहन के बयानों में पति की दूसरी शादी की बात तो सामने आती है, लेकिन सास, ससुर और जेठानी की ओर से दूसरी शादी कराने में निभाई गई कोई विशिष्ट भूमिका नहीं बताई गई। केवल शिकायतकर्ता की मां ने सामान्य आरोप लगाया कि पति के रिश्तेदारों ने दूसरी शादी में सहयोग और साजिश की थी।


कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एस. नितिन बनाम केरल राज्य तथा शिवरामन नायर बनाम केरल राज्य के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि दूसरी शादी के अपराध में केवल जानकारी होना पर्याप्त नहीं है। आरोपी के किसी सक्रिय कृत्य या चूक का प्रथमदृष्टया प्रमाण होना चाहिए, जिससे यह पता चले कि उसने शादी कराने, उसमें सहयोग करने या उसे प्रोत्साहित करने में भूमिका निभाई।


कोर्ट ने सास फूलन देवी उर्फ भूरानी और जेठानी विमला के खिलाफ धारा 494 आईपीसी की कार्यवाही रद्द कर दी। आदेश में ससुर दशरथ सिंह के खिलाफ भी इस धारा में समन आदेश को अस्थिर माना गया। वहीं राम प्रताप सिंह के खिलाफ धारा 494 तथा सभी आरोपियों के खिलाफ धारा 498-ए, 323, 504, 506 आईपीसी और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं 3/4 के तहत कार्यवाही बरकरार रखी गई।


हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मुकदमे की सुनवाई में अनावश्यक स्थगन न देते हुए प्रमाणित आदेश की प्रति प्रस्तुत किए जाने की तारीख से एक वर्ष के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया।