12 August 2026

चार साल में तय नहीं हुई असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड की अर्हता

 

चार साल में तय नहीं हुई असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड की अर्हता, 107 पदों पर भर्ती अटकी

प्रयागराज। प्रदेश के 330 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड की अर्हता का विवाद चार साल बाद भी सुलझ नहीं सका है। बीएड के 107 पदों पर भर्ती के लिए वर्ष 2022 में आवेदन लेने के बाद अब तक चयन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के निर्देशों के बावजूद उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी और विषय विशेषज्ञ अर्हता तय नहीं कर सके हैं।

मामले में असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड के 107 पदों पर भर्ती के लिए तीन बार विज्ञापन जारी किया जा चुका है, जबकि दो बार परीक्षा की तिथि भी टाली जा चुकी है। अर्हता को लेकर अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

12 अगस्त को हाईकोर्ट में सुनवाई

अर्हता को लेकर अभ्यर्थी अंजू ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर 12 अगस्त 2026 को सुनवाई होनी है। याचिका में फाउंडेशन कोर्स और पेडागॉजिकल कोर्स के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यताओं को एक साथ प्रकाशित किए जाने से उत्पन्न भ्रम का मुद्दा उठाया गया है।

एनसीटीई के अनुसार फाउंडेशन कोर्स के लिए सामाजिक विज्ञान में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक तथा परास्नातक और 55 प्रतिशत अंकों के साथ एमएड अथवा शिक्षा में एमए तथा बीएड/बीएलएड की योग्यता निर्धारित है। वहीं पेडागॉजिकल कोर्स के लिए विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान या भाषाओं में 55 प्रतिशत अंकों के साथ परास्नातक और 55 प्रतिशत अंकों के साथ एमएड की योग्यता बताई गई है।

विज्ञापन में अलग-अलग योग्यता से पैदा हुआ भ्रम

याचिका में कहा गया है कि 28 अप्रैल 2026 को जारी विज्ञापन में पेडागॉजिकल कोर्स के लिए संबंधित विषय में परास्नातक के साथ एमएड की आवश्यकता स्पष्ट रूप से अलग नहीं की गई। इसी वजह से अभ्यर्थियों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि पेडागॉजी के लिए एमएड की जगह एमए इन एजुकेशन को मान्य किया जाएगा या नहीं।

अब इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में 12 अगस्त को प्रस्तावित है। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि अदालत के निर्णय के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड के 107 पदों की भर्ती को लेकर लंबे समय से चल रहा अर्हता विवाद समाप्त होगा और चयन प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।