22 August 2026

डिग्री के बाद भी नौकरी की गारंटी नहीं, नीति आयोग की रिपोर्ट ने बताई बड़ी वजह

 

डिग्री के बाद भी नौकरी की गारंटी नहीं, नीति आयोग की रिपोर्ट ने बताई बड़ी वजह

नई दिल्ली। भारत में उच्च शिक्षा का दायरा लगातार बढ़ रहा है और हर साल बड़ी संख्या में युवा डिग्री लेकर निकल रहे हैं, लेकिन डिग्री और रोजगार के बीच का अंतर अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। नीति आयोग की नई रिपोर्ट ने शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच बढ़ते अंतर की तस्वीर सामने रखी है।

रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में सामने आए आंकड़ों में केवल 8.25 प्रतिशत ग्रेजुएट ही ऐसे काम कर रहे हैं, जो उनके शिक्षा स्तर के अनुरूप हैं। वहीं आधे से अधिक ग्रेजुएट इससे कम कौशल वाले काम कर रहे हैं।


80 प्रतिशत छात्रों ने बताई Practical Experience की कमी

18 अगस्त को जारी नीति आयोग की रिपोर्ट ‘Reshaping Skilling for Viksit Bharat@2047’ में उच्च शिक्षा और रोजगार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण चुनौतियों को सामने रखा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 80 प्रतिशत उच्च शिक्षा के छात्रों ने Practical Experience और Industry Exposure की कमी को बड़ी समस्या बताया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई डिग्रियों और डिप्लोमा कार्यक्रमों में वास्तविक काम सीखने के बजाय केवल औपचारिक शिक्षा पर ज्यादा जोर दिया जाता है।

इसका असर यह होता है कि जब छात्र कंपनियों में पहुंचते हैं तो उन्हें स्पष्ट काम, मार्गदर्शन और वास्तविक कार्य सीखने के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते।

55 हजार पदों के लिए 1.86 करोड़ आवेदन

रिपोर्ट में सरकारी नौकरियों को लेकर युवाओं के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा का भी उल्लेख किया गया है। 55 हजार पदों के लिए 1.86 करोड़ आवेदन आने का आंकड़ा शिक्षा और रोजगार के बीच असंतुलन को दिखाता है।

यह स्थिति इस ओर भी संकेत करती है कि बड़ी संख्या में युवा सीमित संख्या वाली सरकारी नौकरियों को रोजगार का प्रमुख विकल्प मान रहे हैं।

2 करोड़ से अधिक छात्र B.A., B.Com और B.Sc. जैसे पाठ्यक्रमों में

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2 करोड़ से अधिक छात्र B.A., B.Com और B.Sc. जैसे पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर रहे हैं। ऐसे सामान्य डिग्री कार्यक्रमों को रोजगार से जोड़ने के लिए नीति आयोग ने पाठ्यक्रमों में व्यावहारिक और उद्योग आधारित कौशल को बढ़ाने पर जोर दिया है।

नीति आयोग ने सुझाया Job-Linked Education का रास्ता

नीति आयोग ने सामान्य डिग्री कार्यक्रमों को रोजगार से जोड़ने के लिए Job-Linked Specialisation, Industry-linked Courses और Work-Integrated Degree Programmes को बढ़ावा देने की सिफारिश की है।

रिपोर्ट में उदाहरण के तौर पर B.Com के साथ Analytics या Digital Marketing, B.A. के साथ Retail या Hospitality तथा B.Sc. के साथ Applied Technology जैसे विकल्प विकसित करने की बात कही गई है।

साथ ही स्कूल स्तर से ही रोजगार और उद्यमिता से जुड़े सामान्य कौशल सीखने तथा आगे चलकर व्यावसायिक विकल्पों से परिचित कराने की सिफारिश की गई है।

वित्त मंत्री ने भी उठाया शिक्षा और रोजगार का सवाल

रिपोर्ट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा हाल में दिए गए एक इंटरव्यू में उठाए गए सवाल का भी उल्लेख है। उन्होंने कहा था कि मौजूदा विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम छात्रों को न तो नौकरी के लिए पर्याप्त रूप से तैयार करते हैं और न ही उद्यमी बनने के लिए।

उन्होंने बीए में अर्थशास्त्र या राजनीतिक विज्ञान जैसे विषयों का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि डिग्री के बाद छात्रों के लिए आगे का स्पष्ट Professional रास्ता क्या है।

डिग्री के साथ कौशल जरूरी

नीति आयोग की रिपोर्ट का मुख्य संदेश यही है कि सिर्फ डिग्री हासिल कर लेना रोजगार की गारंटी नहीं है। आज के बदलते Job Market में Practical Skills, Industry Exposure, Internship, Communication और Workplace Skills का महत्व तेजी से बढ़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा में बड़ी संख्या में छात्र सामान्य डिग्री कार्यक्रमों में दाखिला लेते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब 3.4 करोड़ Undergraduate छात्र पढ़ रहे हैं, जिनमें लगभग 1.13 करोड़ अकेले BA कर रहे हैं, जबकि BA, B.Sc. और B.Com में कुल मिलाकर करीब दो करोड़ छात्र दाखिल हैं।

कॉलेज और नौकरी के बीच बढ़ रहा Gap

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि कॉलेज और नौकरी के बीच एक बड़ा Gap दिखाई दे रहा है। उदाहरण के लिए अर्थशास्त्र पढ़ने वाला छात्र आर्थिक सिद्धांतों को अच्छी तरह समझ सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह किसी कंपनी के वित्तीय आंकड़ों का विश्लेषण करना या कार्यस्थल पर इस्तेमाल होने वाले Software को चलाना जानता हो।

इसी तरह राजनीतिक विज्ञान का विद्यार्थी राजनीतिक सिद्धांतों की जानकारी रख सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि उसे Research, Policy Analysis या Public Affairs का Practical Experience प्राप्त हो।

निष्कर्ष

नीति आयोग की रिपोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में Education System को Degree-Centric से Skill-Centric और Job-Linked बनाने की जरूरत है।

युवाओं को केवल डिग्री देने के बजाय उन्हें यह भी सिखाना होगा कि उस ज्ञान का वास्तविक कार्यक्षेत्र में इस्तेमाल कैसे किया जाए। Degree + Skill + Practical Experience + Industry Exposure का संयोजन ही रोजगार की चुनौती को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इसलिए अब सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि “डिग्री कितने युवाओं ने हासिल की?” बल्कि यह भी होना चाहिए कि “डिग्री लेने के बाद कितने युवा रोजगार के लिए वास्तव में तैयार हैं?”