एडेड संस्कृत विद्यालयों को कैशलेस चिकित्सा में पेंच, कर्मचारियों को नहीं मिल पा रहा लाभ
लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को निःशुल्क कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलने में परेशानी सामने आ रही है। माध्यमिक शिक्षा विभाग को जिलों से आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध न होने के कारण योजना के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो रही है।
दरअसल, बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल रहा है। इस योजना में काफी संख्या में शिक्षक पहले ही शामिल हो चुके हैं। हालांकि सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों के कर्मचारियों की जानकारी मंडल और जिला स्तर के अधिकारियों से समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने इस समस्या का संज्ञान लेते हुए इसके समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरीक्षक, संस्कृत पाठशाला को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
नोडल अधिकारी को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और उसके पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही उन्हें सभी मंडलीय उप निरीक्षकों से व्यक्तिगत संपर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।
कर्मचारियों की प्रक्रिया जल्द पूरी कराने पर जोर
नोडल अधिकारी को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने के साथ ही मंडलीय एवं जिला स्तर के अधिकारियों से संपर्क कर एडेड संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग का उद्देश्य है कि पात्र शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी योजना से वंचित न रहें और उनकी आवश्यक जानकारी जल्द से जल्द उपलब्ध कराकर प्रक्रिया पूरी की जाए।
क्या है कैशलेस चिकित्सा सुविधा?
मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत पात्र सरकारी एवं संबंधित श्रेणी के कर्मचारियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। योजना का उद्देश्य कर्मचारियों को गंभीर बीमारी या आकस्मिक चिकित्सा जरूरत के समय आर्थिक परेशानी से राहत देना है।
अब संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों के पात्र कर्मचारियों को भी इस सुविधा का लाभ दिलाने के लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती पात्र कर्मचारियों की सही जानकारी उपलब्ध कराकर उनकी प्रक्रिया पूरी करना है। विभाग के निर्देश के बाद उम्मीद है कि लंबे समय से अटके इस मामले का जल्द समाधान होगा।

