22 August 2026

अपने वेतन से बच्चों को जूते दिलाए, स्कूल को कुर्सी-मेज और कंप्यूटर से सजाया, शिक्षिका शालिनी को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार

 

अपने वेतन से बच्चों को जूते दिलाए, स्कूल को कुर्सी-मेज और कंप्यूटर से सजाया, शिक्षिका शालिनी को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार

प्रयागराज। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, नवाचार और बच्चों के प्रति समर्पण के लिए प्रयागराज की शिक्षिका शालिनी कुशवाहा को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2022 में उन्हें राज्यकीय अध्यापक पुरस्कार भी मिला था। वर्तमान में वह कंपोजिट विद्यालय रसूलाबाद, कोइलहा (ब्लॉक चायल) में नियुक्त हैं।

प्रशिक्षण के दौरान नंगे पैर बच्चों को देखकर बदला नजरिया

शालिनी ने प्रयागराज के नैनी स्थित त्रिवेणी नगर से शिक्षा-दीक्षा प्राप्त की और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एमए व बीएड किया। इसके बाद उनकी ट्रेनिंग मंझनपुर गौर प्रथम में हुई।

प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने वहां पढ़ रहे 122 बच्चों को नंगे पैर देखा। बच्चों की स्थिति देखकर उन्हें काफी दुख हुआ। उन्होंने अपने स्तर से उन बच्चों के लिए जूते और मोजे खरीदे और प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनकी पहली ज्वाइनिंग प्राथमिक विद्यालय शाहिलपुर चायल में हुई।


स्कूल को बनाया कॉन्वेंट स्कूल जैसा

शालिनी ने विद्यालय में बच्चों की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया। बच्चे जमीन पर बैठते थे, इसलिए उन्होंने उनके लिए कुर्सियां उपलब्ध कराईं।

वर्ष 2018 में उनका स्थानांतरण कंपोजिट स्कूल रसूलाबाद चायल में हुआ। यहां उन्होंने विद्यालय को कॉन्वेंट स्कूल की तरह विकसित करने का प्रयास किया। स्कूल में चेयर, टेबल, कंप्यूटर और सिस्टम-प्रोजेक्टर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

पुरस्कार की राशि भी बच्चों पर खर्च

शिक्षिका शालिनी को वर्ष 2022 में राज्य अध्यापक पुरस्कार मिला। पुरस्कार के रूप में मिली 25 हजार रुपये की राशि में से 22 हजार रुपये उन्होंने अपने वेतन से मिलाकर बच्चों के लिए खर्च किए।

उन्होंने लगभग 47 हजार रुपये की लागत से सभी बच्चों को यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई। इस पहल से बच्चों में विद्यालय के प्रति उत्साह और अपनापन बढ़ा।

आईसीटी में भी हासिल कर चुकी हैं पुरस्कार

शालिनी को वर्ष 2018 और 2022 में ICT (Information and Communication Technology) में दो बार अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा कहानी सुनाओ प्रतियोगिता 2021 में भी उन्हें पुरस्कार प्राप्त हुआ।

लगातार तीन वर्षों तक योग में पुरस्कार हासिल करने का भी उल्लेख किया गया है।

बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने का लक्ष्य

शालिनी का कहना है कि वह बच्चों के लिए बहुत कुछ करना चाहती हैं, ताकि बच्चे अपनी शिक्षा के बल पर भविष्य को बेहतर बना सकें।

उनके कार्यों की विभागीय स्तर पर भी सराहना हुई है। बीएसए डॉ. कमलेन्द्र कुशवाहा समेत अन्य विभागीय अधिकारियों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

शालिनी की कहानी बताती है कि जब शिक्षक अपने कर्तव्य को केवल नौकरी न मानकर बच्चों के भविष्य को संवारने का माध्यम बना लेते हैं, तो सीमित संसाधनों में भी विद्यालय में बड़ा बदलाव संभव है।