स्कूलों में बढ़ रहा नशे का खतरा, मोबाइल-इंटरनेट से बढ़ी समस्या
देशभर के 6,168 किशोरों पर हुए अध्ययन में खुलासा, गुवाहाटी में स्थिति गंभीर
नई दिल्ली। स्कूल जाने की उम्र में नशे का खतरा बच्चों पर तेजी से बढ़ रहा है। आईसीएमआर के छह शहरों के स्कूलों पर हुए महत्वपूर्ण अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। गुवाहाटी के स्कूलों में 42.3% किशोर मध्यम या ज्यादा खतरे वाली श्रेणी में मिले। वहीं पुडुचेरी में यह आंकड़ा सिर्फ 0.1% रहा।
गोरखपुर में भी 24.5% किशोर इस श्रेणी में थे। अध्ययन में यह भी सामने आया कि जिन किशोरों को नशीले पदार्थ आसानी से मिल सकते हैं और जो मोबाइल-इंटरनेट की दुनिया में ज्यादा समय बिताते हैं, उनमें नशे से जुड़े खतरे की संभावना ज्यादा रहती है। शोध को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर, गुवाहाटी, नागपुर, राजकोट और देवघर तथा जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (जिपमेर), पुडुचेरी के शोधकर्ताओं ने किया। लड़कों की तुलना में लड़कियों पर खतरा ज्यादा है।
हर चार में करीब एक किशोर खतरे में (शहरवार आंकड़े)
| शहर / जगह | मध्यम से ज्यादा खतरे का प्रतिशत |
|---|---|
| गुवाहाटी | 42.3% |
| देवघर | 41.3% |
| गोरखपुर | 24.5% |
| राजकोट | 13.5% |
| नागपुर | 7.1% |
| पुडुचेरी | 0.1% |
- 6,168 किशोरों पर हुए अध्ययन में बड़ा अंतर सामने आया।
- 24.5% किशोर मध्यम से ज्यादा खतरे की श्रेणी में गोरखपुर के चुने गए स्कूलों में मिले।
108 स्कूलों से मिला डाटा
शोधकर्ताओं ने अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच आंकड़े जुटाए। अध्ययन में छह जगहों के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 10 से 19 साल के किशोरों को शामिल किया गया।
कुल 108 स्कूलों से 6,168 किशोर अध्ययन में शामिल हुए। इनमें गोरखपुर से 1,223, गुवाहाटी से 890, नागपुर से 1,082, राजकोट से 919, देवघर से 1,066 और पुडुचेरी से 988 किशोर शामिल थे। छह जगहों के आंकड़ों को मिलाकर 21.4 प्रतिशत किशोर मध्यम या ज्यादा नशा-जोखिम वाली श्रेणी में मिले।
नशीली चीजें आसानी से मिलें तो खतरा बढ़ा
शोध के मुताबिक जिन किशोरों को लगा कि आसपास नशीली चीजें आसानी से मिल सकती हैं, उनमें ज्यादा खतरे वाली श्रेणी में आने की संभावना अधिक थी। खासतौर पर मोबाइल और इंटरनेट समेत डिजिटल माध्यमों पर ज्यादा समय बिताने वालों में खतरे की आशंका ज्यादा है। ज्यादा डिजिटल संपर्क वाले किशोरों में ज्यादा खतरे वाली श्रेणी में आने की संभावना बढ़ी हुई थी।

