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19 July 2025

अमान्य विद्यालय संचालित मिले तो बीईओ होंगे जिम्मेदार

 

लखनऊः कम नामांकन वाले परिषदीय विद्यालयों के विलय के बाद अन्य परिषदीय विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने - पर जोर है। इसके लिए प्रदेश में बिना मान्यता के संचालित निजी विद्यालयों पर शिकंजा भी कसा जा रहा है। अब किसी जिले में बगैर मान्यता वाले विद्यालय संचालित मिलेंगे तो संबंधित ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सीधे जिम्मेदार माने जाएंगे।



निश्शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत ऐसे अमान्य विद्यालयों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अतिरिक्त अगर ये विद्यालय निर्देशों का लगातार उल्लंघन करते पाए जाते हैं, तो हर दिन के हिसाब से 10 हजार रुपये तक का जुर्माना भी वसूला जा सकेगा।


बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने कुछ दिन पहले सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि विशेष अभियान चलाकर अमान्य विद्यालयों की पहचान करें और उनके विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही, ऐसे विद्यालयों की सूची 15 जुलाई

तक निदेशालय को भेजी जाए। जुलाई के बाद किसी जिले में अमान्य विद्यालय संचालित मिले तो उसके लिए संबंधित ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार माने जाएंगे। उधर, शिक्षक संगठनों का आरोप है कि इन अमान्य विद्यालयों को अधिकारियों की मौन स्वीकृति प्राप्त है, जिसके चलते ये वर्षों से संचालित हो रहे हैं। इनमें पढ़ने वाले बच्चों का यू-डायस नंबर न होने के कारण उनका नामांकन बाद में सरकारी विद्यालयों में नहीं हो पाता। यही वजह है कि परिषदीय विद्यालयों में नामांकन घट रहा है, जबकि अमान्य निजी विद्यालयों की संख्या बढ़ रही है। लगभग हर जिले में कुछ विद्यालय ऐसे हैं जो न तो मान्यता प्राप्त हैं और न ही यू-डायस पोर्टल पर पंजीकृत हैं। ऐसे विद्यालय शिक्षा के अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन कर रहे हैं।

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