उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए यूजीसी द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों पर सरकार दोबारा विचार कर रही है। केंद्र सरकार की ओर से गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी गई।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आग्रह किया कि जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक मामले में तय किए जाने वाले सवालों को टाल दें। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा, वह अभी सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल रहे हैं।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में यूजीसी (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए) नियमन-2026 लागू करने पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने इसके दुरुपयोग की आशंका जताई थी।
नए नियमन को लेकर टकराव
उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव खत्म करने के लिए बनाए गए नए
नियमन का सामान्य वर्गों द्वारा विरोध किया जा रहा है। आरक्षित वर्ग इसमें किसी भी तरह के बदलाव के विरोध में है। नए नियमन को चुनौती देने वाली याचिकाओं कहा गया है कि ये नियम ‘सामान्य वर्गों’ के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं।

