21 August 2026

बच्चों को केवल क्लास में न भेजें, उनसे बात करें और लड़कियों का सम्मान करना सिखाएं: सुप्रीम कोर्ट की तीन सलाह

 

बच्चों को केवल क्लास में न भेजें, उनसे बात करें और लड़कियों का सम्मान करना सिखाएं: सुप्रीम कोर्ट की तीन सलाह

नई दिल्ली। बच्चों को बेहतर और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उन्हें लगातार अलग-अलग कक्षाओं में भेजना ही पर्याप्त नहीं है। माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताकर उनसे बातचीत करनी चाहिए। इससे बच्चों के बीच भरोसा और मजबूत रिश्ता बनेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की परवरिश और शिक्षा को लेकर ये महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।


सलाह-1: बच्चों से बातचीत और संस्कार जरूरी

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कस्टडी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि बच्चों को संगीत, कला या ताइक्वांडो जैसी गतिविधियों के लिए बहुत ज्यादा कक्षाओं में भेजना जरूरी नहीं है।

माता-पिता को रोज कुछ समय बच्चों के सवालों पर चर्चा करने और अपने अनुभव साझा करने में लगाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अच्छे संस्कार और दूसरों के प्रति सम्मान सिखाना भी माता-पिता की जिम्मेदारी है। खासकर लड़कों को लड़कियों और महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की सीख दी जानी चाहिए।

सलाह-2: डिजिटल दौर में खेल और शारीरिक गतिविधियां जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिजिटल दौर में बच्चे मैदानों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में स्कूलों में खेल और शारीरिक गतिविधियों को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाना जरूरी है।

जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ स्कूलों में खेल अनिवार्य करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में खेल और शारीरिक साक्षरता को मौलिक अधिकार बनाने की मांग भी की गई है। यह याचिका 2017 में कानून के छात्र कनिष्का पांडे ने दायर की थी। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति गोपाल शंकरनारायणन ने वर्ष 2022 में सुझाव दिया था कि सभी स्कूल रोजाना कम से कम 90 मिनट का समय खेल और गेम्स के लिए निर्धारित करें।

सलाह-3: बच्चों पर त्रिभाषा का दबाव न पड़े

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की त्रिभाषा नीति को लेकर कहा कि नीति लागू करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन बच्चों पर किसी तरह का दबाव नहीं पड़ना चाहिए।

जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने कक्षा नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाएं अनिवार्य करने से जुड़ी चुनौतियों पर केंद्र से समाधान खोजने को कहा। पीठ ने कहा कि नीति को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाए और इसमें आने वाली बाधाओं का समाधान किया जाए।

भाषा सीखना अमूल्य चीज

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी भाषा सीखना बड़ी संपत्ति और अमूल्य चीज है। यदि कोई भाषा सीख रहा है तो उसके लिए शिक्षकों की भी योजना बनानी होगी। वहीं, यदि स्कूल स्तर पर किसी तरह की गलती हो रही है तो संबंधित जिम्मेदारी तय की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट की इन टिप्पणियों में बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ परिवार का संवाद, खेल-कूद, अच्छे संस्कार, लैंगिक सम्मान और भाषा सीखने के संतुलन पर जोर दिया गया है।