08 September 2026

सोने से कम नहीं गुरुग्राम की ये जमीन, यहां 5 साल में 135% बढ़ गए प्रॉपर्टी के दाम…कीमत सुनकर चौंक जाएंगे

द्वारका एक्सप्रेसवे: 5 साल में 135% उछले दाम, अब गोल्फ कोर्स रोड को टक्कर दे रहा नया लग्जरी हब

गुरुग्राम का द्वारका एक्सप्रेसवे अब किफायती आशियानों का विकल्प नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर का सबसे तेजी से उभरता 'गोल्ड कोस्ट' बन चुका है। बीते पांच वर्षों में यहां प्रॉपर्टी की कीमतों में करीब 135% का जोरदार उछाल आया है। कभी केवल भविष्य की संभावनाओं के नाम पर बिकने वाला यह 29 किलोमीटर लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर आज गुरुग्राम के पारंपरिक रईस इलाकों को सीधी टक्कर दे रहा है।


कीमतें और मार्केट ट्रेंड्स

  • प्रीमियम रेट: इलाके में औसत आवासीय दरें ₹21,700 से ₹24,000 प्रति वर्ग फीट के दायरे में पहुंच चुकी हैं।

  • बजट सेगमेंट में बदलाव: ANAROCK के आंकड़ों के अनुसार, यहां अब ₹2.5 करोड़ से अधिक कीमत वाले अपार्टमेंट्स मुख्य वॉल्यूम ड्राइवर बन चुके हैं।

  • बड़ी यूनिट्स की मांग: नई सप्लाई में 3-BHK की हिस्सेदारी करीब 39% है। डेवलपर्स अब कम घनत्व (low-density), ज्यादा खुली जगह और 3-BHK व 4-BHK वाले बड़े लग्जरी अपार्टमेंट्स पर फोकस कर रहे हैं।

  • मजबूत सप्लाई: स्क्वॉयर यार्ड्स के डेटा के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान यहां लगभग 115 एक्टिव रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स और 14,000 नई यूनिट्स दर्ज की गईं।

तेजी की मुख्य वजह: कनेक्टिविटी का गेमचेंजर साबित होना

द्वारका एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने से दक्षिण-पश्चिम दिल्ली और गुरुग्राम के बीच का सफर बेहद आसान हो गया है। यह सीधे NH-48 से जुड़ता है, जिससे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट, साइबर सिटी, उद्योग विहार और मानेसर जैसे प्रमुख आईटी व इंडस्ट्रियल हब्स तक पहुंच मिनटों की रह गई है। बड़े लैंड पार्सल उपलब्ध होने के कारण बिल्डर्स यहां आधुनिक एमिनिटीज वाले गेटेड टाउनशिप बना रहे हैं।

गोल्फ कोर्स रोड से तुलना और आगे की चुनौतियां

पैमानाद्वारका एक्सप्रेसवेगोल्फ कोर्स रोड
नेचरउभरता हुआ लग्जरी हबस्थापित अल्ट्रा-लग्जरी कॉरिडोर
सोशल इंफ्रास्ट्रक्चरअभी विकास के चरण मेंदशकों पुराना मजबूत रिटेल, डाइनिंग व स्कूल नेटवर्क
ग्रोथ ड्राइवरएयरपोर्ट कनेक्टिविटी, ग्लोबल सिटीकॉरपोरेट हब, स्थापित प्रीमियम लाइफस्टाइल
फिलहाल इस इलाके का इन्वेंट्री ओवरहैंग करीब 18 महीने है, जो यह दर्शाता है कि बिना बिके फ्लैट्स का स्तर नियंत्रण में है। हालांकि, रियल एस्टेट विश्लेषकों का मानना है कि यदि कीमतें इसी रफ्तार से बढ़ती रहीं और लगातार नई सप्लाई आती रही, तो खरीदारों की रफ्तार सुस्त पड़ने पर बिना बिकी इन्वेंट्री का दबाव बढ़ सकता है। इसके बावजूद, आगामी 'ग्लोबल सिटी' प्रोजेक्ट और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर इसे हाई-नेट-वर्थ बायर्स (HNIs) की पहली पसंद बनाए हुए हैं।