स्कूलों की जांच कौन करे? शिक्षक ने उठाए सवाल, बाहरी लोगों के स्कूल में पहुंचने पर जताई चिंता
लखनऊ। सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं और निरीक्षण को लेकर एक शिक्षक की ओर से सोशल मीडिया पर साझा की गई टिप्पणी चर्चा में है। शिक्षक ने सवाल उठाया है कि स्कूलों की व्यवस्थाओं की जांच के लिए विभागीय स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यवस्था पहले से मौजूद है, ऐसे में कोई भी व्यक्ति स्कूल परिसर में पहुंचकर वीडियो बनाने लगे तो इस पर निगरानी और स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
शिक्षक के मुताबिक स्कूलों की व्यवस्थाओं को चेक करना विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है। मान्यता प्राप्त पत्रकार भी बीएसए कार्यालय से अनुमति लेकर विद्यालय में पहुंच सकते हैं। वहीं जिन बच्चों के माता-पिता के बच्चे संबंधित विद्यालय में पढ़ते हैं, वे स्कूल जाकर उचित सवाल कर सकते हैं।
“कोई भी स्कूल में पहुंचकर वीडियो बनाने लगे तो?”
सोशल मीडिया पोस्ट में शिक्षक ने आपत्ति जताते हुए कहा कि अब ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां कोई भी व्यक्ति स्कूल में पहुंचकर वीडियो बनाने लगता है। पोस्ट में एक व्यक्ति के विद्यालय परिसर में वीडियो बनाते हुए दिखाई देने का संदर्भ देते हुए सवाल उठाया गया कि क्या स्कूलों की जांच के लिए निर्धारित विभागीय व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
शिक्षक ने यह भी सवाल किया कि “स्कूल चेक करने के लिए DM, CDO, BSA, BEO, ARP, SRG, DIET Mentor आदि अधिकारी और कर्मचारी हैं, अब क्या सभी लोग स्कूल ही चेक करेंगे?”
विभागीय निरीक्षण व्यवस्था पर जोर
शिक्षक ने अपनी टिप्पणी में यह भी सवाल उठाया कि यदि स्कूलों में व्यवस्थाओं की जांच का उद्देश्य वास्तविक कमियों को सामने लाना है तो इसके लिए विभागीय अधिकारियों के माध्यम से निरीक्षण की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आई टिप्पणी एक व्यक्तिगत प्रतिक्रिया/आपत्ति है। किसी बाहरी व्यक्ति के विद्यालय में प्रवेश, वीडियो बनाने या निरीक्षण करने की वैधानिक स्थिति संबंधित विभागीय नियमों और अनुमति व्यवस्था पर निर्भर करेगी। इसलिए किसी वायरल वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी व्यक्ति अथवा विद्यालय के खिलाफ निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
मामला सामने आने के बाद स्कूलों के निरीक्षण, बाहरी लोगों के प्रवेश और विद्यालय परिसर में वीडियो बनाने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देशों की जरूरत पर चर्चा शुरू हो गई है।
