14 August 2026

पेंशन सेक्टर के लिए एकल नियामक की जरूरत, CAG रिपोर्ट में व्यवस्था सुधारने पर जोर

 

पेंशन सेक्टर के लिए एकल नियामक की जरूरत, CAG रिपोर्ट में व्यवस्था सुधारने पर जोर

नई दिल्ली। देश के पेंशन सेक्टर को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में मौजूदा व्यवस्था की कई खामियों को उजागर किया गया है। रिपोर्ट में पेंशन क्षेत्र के लिए एकल नियामक व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया गया है, ताकि अलग-अलग संस्थाओं के बीच बंटे नियमन को व्यवस्थित किया जा सके और सब्सक्राइबर के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो।

CAG की रिपोर्ट के अनुसार भारत में पेंशन सेक्टर में अलग-अलग संस्थाएं अपनी-अपनी योजनाओं और क्षेत्रों तक सीमित हैं। इसके कारण किसी एक मंत्रालय या संगठन के पास सब्सक्राइबर्स की कुल संख्या, उनकी संपत्ति और पूरे पेंशन सिस्टम की समग्र जानकारी उपलब्ध नहीं है।


अलग-अलग संस्थाओं के कारण आंकड़ों में कमी

रिपोर्ट के मुताबिक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी पेंशन योजना से जुड़ी जानकारी रखता है, जबकि पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) मुख्य रूप से नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) पर ध्यान केंद्रित करता है। वहीं कोयला खान भविष्य निधि संगठन (CMPFO) और सीमंस भविष्य निधि संगठन (SPMCFO) भी अपने-अपने क्षेत्र की योजनाओं तक सीमित हैं।

CAG ने कहा है कि इस बिखरी हुई व्यवस्था के चलते पेंशन सेक्टर की वास्तविक और व्यापक तस्वीर सामने नहीं आ पाती है।

एकल नियामक से खत्म हो सकता है दोहराव

रिपोर्ट में कहा गया है कि पेंशन सेक्टर के लिए एक एकल नियामक बनाने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे नीतियों को सुव्यवस्थित किया जा सकता है, नियामकीय दोहराव खत्म हो सकता है और सब्सक्राइबर्स की सुरक्षा में एकरूपता लाई जा सकती है।

CAG की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जैसे बैंकिंग क्षेत्र के लिए RBI, बीमा क्षेत्र के लिए IRDAI और शेयर बाजार के लिए SEBI नियमन का काम करते हैं, उसी तरह पेंशन सेक्टर के लिए भी एक प्रभावी और समग्र नियामक व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।

अलग-अलग पेंशन योजनाओं में लाभ का अंतर

CAG की रिपोर्ट में पेंशन योजनाओं के बीच मिलने वाले लाभों में बड़े अंतर का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार EPFO प्रोविडेंट फंड, मासिक पेंशन और जीवन बीमा का पैकेज उपलब्ध कराता है, जबकि NPS में मुख्य रूप से प्रोविडेंट फंड जैसी सुविधा उपलब्ध होती है।

पुरानी पेंशन स्कीम में निश्चित पेंशन की गारंटी का प्रावधान था, जबकि NPS बाजार से जुड़ा मॉडल है, जिसमें प्रोविडेंट फंड लाभ की गारंटी नहीं होती। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था में कम से कम एक हजार रुपये की पेंशन गारंटी का प्रावधान है, जबकि NPS में ऐसी गारंटी नहीं है।

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, पेंशन सेक्टर में एक समान और प्रभावी नियामकीय ढांचा विकसित करने से न केवल व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी, बल्कि करोड़ों सब्सक्राइबर्स के हितों की सुरक्षा भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी।