20 राज्यों में फैले साइबर ठगी के नेटवर्क को ED ने किया ध्वस्त, ₹27,850 करोड़ के लेनदेन के सबूत
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने साइबर धोखाधड़ी की रकम को ठिकाने लगाने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क 20 राज्यों में फैला हुआ था और इसके जरिए करोड़ों रुपये की रकम विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर विदेश भेजी जा रही थी।
जांच के दौरान ED को इस नेटवर्क से जुड़े कंपनियों के बैंक खातों में ₹27,850 करोड़ के बैंकिंग लेनदेन के सबूत मिले हैं। इनमें करीब ₹2,904 करोड़ नकद जमा किए गए थे, जबकि लगभग ₹585 करोड़ अन्य-अन्य स्थानों पर लगी 61,448 ब्लैंक नोट एक्सपर्ट मशीनों के जरिए जमा कराए जाने की जानकारी सामने आई है।
400 से ज्यादा बैंक खातों में रकम ट्रांसफर
जांच में पता चला कि एक घंटे के भीतर करीब 400 बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की जाती थी और इसके बाद उसे विदेश भेज दिया जाता था। इस नेटवर्क में कमोडिटी, ट्रेडिंग और फॉरेक्स से जुड़ी कई कंपनियां इंटरकनेक्टेड नेटवर्क के तौर पर काम कर रही थीं।
ED के अनुसार, साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ 20 राज्यों में 330 पीड़ितों की शिकायतें और 163 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी मिली है।
गोवा और मुंबई में छापेमारी
ED ने 17 जुलाई को गोवा और मुंबई में 20 स्थानों पर छापेमारी की थी। इसके बाद 21 अगस्त को फिर से कार्रवाई की गई। तलाशी के दौरान 3.25 करोड़ रुपये की नकदी, साथ ही कई डिजिटल उपकरण, कंपनियों के रजिस्टर और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए।
इस मामले में ED ने गोवा से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
महिला से डिजिटल अरेस्ट कर ₹2.60 करोड़ की ठगी
जांच के दौरान एक महिला के साथ हुई साइबर ठगी का मामला भी सामने आया। महिला को साइबर ठगों ने करीब 11 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और इस दौरान उससे लगभग ₹2.60 करोड़ की ठगी की गई।
पीड़ित महिला से ठगों ने सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट के नाम पर पैसे जमा कराए थे। जांच में पता चला कि महिला के खाते से पैसा निकलने के बाद उसे कई अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया और फिर नकद निकालकर नेटवर्क से जुड़े खातों में जमा कराया गया। इसके बाद रकम विदेश भेजे जाने की बात सामने आई।
ED ने इस मामले में फहीम मोइन हुसैन सैयद और नजम मोइन सैयद को गिरफ्तार किया है।
साइबर ठगी की रकम को विदेश भेजने का नेटवर्क
जांच एजेंसी के अनुसार, नेटवर्क में शामिल कंपनियां साइबर ठगी से हासिल रकम को कई बैंक खातों के माध्यम से घुमाकर उसे विदेश भेजने का काम कर रही थीं। मामले में आगे की जांच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों एवं कंपनियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

