हाउस रेंट के फैसले का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा? किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए बदले नियम
किरायेदारों को मनमानी किराया बढ़ोतरी से राहत, मकान मालिकों के लिए भी नई स्थिति
किराये के मकान और दुकानों को लेकर लागू नियमों में बदलाव के बाद किरायेदारों और मकान मालिकों दोनों के लिए स्थिति बदलने वाली है। नए प्रावधानों के तहत पुराने कानून और नई व्यवस्था के बीच अंतर को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
किरायेदारों को क्या राहत मिलेगी?
नए प्रावधानों के अनुसार मनमाने तरीके से किराया बढ़ाने पर रोक लगेगी। रेंट अथॉरिटी अब 2021 के कानून की धारा 10 के तहत बाजार दर का हवाला देकर एकतरफा भारी किराया तय नहीं कर सकेगी।
इसके अलावा जबरन बेदखली पर भी रोक रहेगी। रेंट अथॉरिटी के सीधे आदेश से किरायेदार को खाली कराने का रास्ता बंद हो गया है। ऐसे मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
मकान मालिकों के लिए क्या बदलेगा?
मकान मालिकों के लिए भी किराया संशोधन को लेकर नई व्यवस्था लागू होगी। यदि मकान मालिक को मकान या दुकान खाली करवानी है अथवा किराया तय करना है तो निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
चित्र में दी गई जानकारी के अनुसार, यदि मकान मालिक को मकान/दुकान खाली करवानी है या किराया तय कराना है तो मामले में 1972 के अधिनियम अथवा सिविल कोर्ट/स्मॉल कॉज कोर्ट के नियमों के तहत कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।
पहले से निपटे मामलों का क्या होगा?
21 अगस्त 2026 तक जिन मामलों में कोई विवाद नहीं था और दोनों पक्षों ने नए कानून के तहत आपसी सहमति से नया एग्रीमेंट कर लिया था या किराया बढ़ा लिया था तथा किसी पक्ष ने अदालत में चुनौती नहीं दी थी, वे मामले मान्य रहेंगे।
वहीं, रेंट अथॉरिटी के जिन आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, उन्हें अदालत द्वारा रद्द किए जाने की जानकारी दी गई है।
नए मामलों में क्या होगा?
भविष्य में किरायेदारी और बेदखली से जुड़े विवादों का निर्धारण पुराने कानून (1972 एक्ट) और ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट के आधार पर किया जाएगा। यानी नए विवादों में संबंधित कानूनों के तहत ही कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।
किराया बढ़ाने पर भी नियम लागू
किराये में मनमानी बढ़ोतरी पर रोक के साथ किराया संशोधन के लिए निर्धारित प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। नए नियमों के तहत मकान मालिक अपनी मर्जी से एकतरफा भारी किराया बढ़ोतरी नहीं कर सकेगा।
कुल मिलाकर, नए फैसले का सबसे बड़ा असर यह है कि किरायेदारों को मनमानी किराया वृद्धि और सीधे प्रशासनिक आदेश से बेदखली के खिलाफ राहत मिल सकती है, जबकि मकान मालिकों को किराया बढ़ाने या संपत्ति खाली कराने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।

