जातीय जनगणना की गिनती नहीं, हिस्सेदारी की जंग तेज; चुनावी समीकरण साधने की तैयारी
नई दिल्ली। जातीय जनगणना को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। ओबीसी की वास्तविक संख्या सामने आने की आशंका और उससे जुड़े सामाजिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को लेकर विपक्षी दल केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति में जुटे हैं। आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए जातिगत जनगणना का मुद्दा राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
खबर के अनुसार, उत्तर प्रदेश समेत 2027 में विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में जातिगत जनगणना, ओबीसी आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा चुनावी बहस के केंद्र में आ सकता है। राजनीतिक दल जनगणना के आंकड़े सामने आने से पहले ही अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं।
जातीय जनगणना को लेकर सियासत तेज
जातीय जनगणना के समर्थन में विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से लगातार आवाज उठाई जा रही है। उनका तर्क है कि समाज के अलग-अलग वर्गों की वास्तविक संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति के स्पष्ट आंकड़े मिलने से सामाजिक हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व तय करने में मदद मिलेगी।
वहीं, जातीय जनगणना की प्रक्रिया और इसके संभावित राजनीतिक प्रभाव को लेकर सत्ता पक्ष भी सतर्क है। आने वाले चुनावों में इसका असर चुनावी समीकरणों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
अखिलेश यादव ने केंद्र पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। खबर में उनके हवाले से कहा गया है कि मौजूदा जातिगत जनगणना प्रक्रिया को लेकर केंद्र की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि यदि केंद्र सरकार जातीय जनगणना को लेकर प्रभावी कदम नहीं उठाती है, तो उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर तीन महीने के भीतर जातीय जनगणना कराने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।
ओबीसी आरक्षण और प्रतिनिधित्व बनेगा बड़ा मुद्दा
जातीय जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ओबीसी आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई बहस शुरू होने की संभावना है। विपक्षी दलों का कहना है कि विश्वसनीय आंकड़ों के बिना विभिन्न सामाजिक वर्गों की हिस्सेदारी का सही आकलन करना मुश्किल है।
वहीं, जातिगत जनगणना के आंकड़ों की विश्वसनीयता, प्रक्रिया और उनके इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है।

